पूंजीवादी,फासीवादी,विभाजनकारी,शोषणकारी,साम्प्रदायिक व हिंसक ताकतों को प्रदेश व देश दोनों स्तरों पर परास्त करने हेतु व्यापक व साझा रणनीति !

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*( साभार प्राप्त श्री अनिलजी यादव , जयपुर , राजस्थान)*
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*सम्माननीय देशप्रेमियों!
जय हिंद!*

*सर्वविदित है कि देश की केन्द्रीय सत्ता पर स्थाई कब्जा जमाने में जुटी पूंजीवादी, फासीवादी, विभाजनकारी, शोषणकारी, साम्प्रदायिक व हिंसक ताकतों द्वारा देश को लगातार अराजकता, नफरत, हिंसा व गृहयुद्ध जैसे आफतकाल की ओर धकेला जा रहा है।*

*भय, भक्ति और गर्व की अफीम चटा कर नागरिकों को एक विवेकहीन व संवदना विहीन भीड़ में बदला जा रहा है। प्रोपेगेंडा फिल्मों, बिके हुए मीडिया संस्थानों एवं आईटी सैल द्वारा संचालित सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को नशे,सट्टे,अश्लीलता,धृणा,हिंसा, भय जैसे घातक व गैर जरूरी मुद्दों में झौंका जा रहा है तथा उन्हें उनके जीवन से जुड़े वास्तविक मुद्दों से लगातार भटकाया जा रहा है।*

*भड़काऊ मुद्दों की आँच में महँगाई, बेरोजगारी, आंतरिक व बाह्य सुरक्षा, संसाधनों की आर्थिक लूट, नागरिकों के मूल अधिकारों, कानून के राज, अर्थव्यवस्था की स्थिरता जैसे अनिवार्य मुद्दों को भस्म करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।*

*संवैधानिक व सरकारी एजेंसीयों पर फासिस्ट ताकतों ने कब्जा कर लिया है जिसके कारण संवैधानिक व सरकारी एजेंसियाँ असहमति रखने वाले अपने ही देश के नागरिकों के साथ गुण्डों जैसा व्यवहार कर रही हैं ।*
*इतना ही नहीं अलग-अलग संगठनों के नामों से बनाई गई गुण्डों की निजी गैंगें सरकारी संरक्षण में देश में अस्थिरता पैदा कर रही हैं, नागरिकों को डरा व सता रही हैं।*

*निजीकरण,आपराधिकरण एवं नफरतीकरण के मूल मंत्र के जरिए चौबीसों घंटे चुनावी जीत की जुगत में जुटे फॉसिस्ट लोग विदेशी ताकतों के दुष्प्रभाव में आकार ‘भारत’ जैसे महान् देश की एकता व अखण्डता को खण्ड-खण्ड करने पर तुले हैं वो भी ‘राष्ट्रवाद’ का नारा देकर, तिरंगें की कसमें खाकर, संसद की चौखट चूमकर, भारत को लोकतंत्र की जननी बताकर।*

*देश में किसान,मजदूर, महिला, सरहद के जवान, नौजवान, मजदूर, आदिवासी, अल्पसंख्यक ,मीडियाकर्मी, कानूनविद्, शिक्षाविद्, साहित्यकार, कवि आदि आदि से लेकर शायद ही ऐसा कोई देशप्रेमी वर्ग हो जो इस अघोषित आपातकाल एवं स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रहे आफतकाल से चिंतित, दुःखी एवं भयभीत ना हो रहा हो।*

*भय सिर्फ इस बात का नहीं है कि हमारा क्या होगा ? मुख्य भय इस बात का है कि देष का क्या होगा ? हमारी आने वाली पीढ़ियों का क्या होगा ?*

*इस भय का यदि कोई समाधान हो सकता है तो वो है ‘एकता’। ‘एकता’ विपक्षी दलों की, ‘एकता’ गैर-राजनीतिक संगठनों की और ‘एकता’ देष के आम नागरिकों की।*

*हमें देश में खून की नदियाँ बहाने और लाशों पर राजनीति करने की इच्छा रखने वाले लोगों द्वारा निरंतर रोपी जा रही नफ़रत की ख़रपतवार को ना सिर्फ उखाड़ फेंकना होगा वरन्क देश के प्रत्येक नागरिक के दिल में ‘एकता और विश्वास ’ का बीज बोना ही होगा ताकि देश में प्रेम व विकास की फसल लहलहाए नाकि विनाश का मंजर हम और हमारे बच्चों का मुकद्दर बन जाए ।*

*याद रहे हमें देश को महान् बनाना है ‘शमशान’ ‘कब्रिस्तान’ या ‘वीरान’ नहीं।*

*फासिस्ट ताकतों से ‘राष्ट्र रक्षा’ हेतु मजबूत रणनीति निर्माण के क्रम में हम निम्न बिन्दुओं को मूर्तरूप देने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं :-*

*1. जयपुर स्तर पर फासीवाद विरोधी, गैर साम्प्रदायिक, संविधानप्रेमी विचार के समर्थक सभी वर्गो व संगठनों के करीब 500 प्रबुद्ध लोगों को सूचीबद्ध कर उनकी एक मजबूत वैचारिक टीम तैयार की जाए।*

*2. जयपुर में देश भर के जानेमाने व वर्तमान आफतकाल से चिंतित करीब 250 हस्तियों को सूचिबद्ध किया जाए तथा उनके साथ एकमुश्त या 50-50 की किश्त में ‘तानाशाही व तानाशाह दोनों की विदाई पर एक ‘विशेष प्लानिंग मीटिंग’ का आयोजिन किया जाए।*

*3. विगत एक दशक से जारी ‘आफतकाल’ में फासिस्ट ताकतों द्वारा सम्पन्न प्रत्येक काले कारनामें पर सटीक तथ्यों के साथ खण्ड वाईज छोटी-छोटी पुस्तिकाएं ‘ब्लैक पेपर’ के रूप में प्रकाशित व वितरित की जाएं तथा उनपर अलग—अलग बैनरों पर विषय वार जन चर्चा/गोष्ठी आयोजित की जाएं।*

*4. ‘आफतकाल’ से मुक्ति के लक्ष्य को लेकर पाँच-पाँच लोगों की एक या एक से अधिक स्थाई टीमें बनाई जाएं तथा उन्हें लक्ष्यपूर्ति हेतु आवश्यक सभी उचित संसाधन उपलब्ध करा कर प्रदेश एवं देश दोनों स्तरों पर इस अभियान को गति प्रदान की जाए।*

*5.एससी,एसटी,ओबीसी,अल्पसंख्यक वर्गों से जुड़े तमाम छोटे-बड़े सामाजिक संगठनों एवं उनके प्रमुख पदाधिकारियों को सूचीबद्ध किया जाए। उन्हें साझा मंच पर लाया जाए तथा व्यापक चर्चा के बाद उनकी ओर से साझा अपील जारी जाए कि आने वाले चुनाव में देश व समाज के व्यापक हित में निजी हित का त्याग करते हुए सर्वप्रथम तो फासिस्ट ताकतों के टिकट का ही बहिष्कार कर दिया जाए, यदि ऐसा संभव ना हो तो इन वर्गों के लोगों को फासिस्ट ताकतों के टिकट पर खड़े प्रत्याशी को वोट देने का ही बहिष्कार कर देना चाहिए।*

*6. विपक्षी राजनीतिक दलों पर फासिस्ट ताकतों के विरूद्ध साझा उम्मीदवार उतारने का दबाब बनाया जाए इसके लिए प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर के सभी नेताओं से उचित समय लेकर सम्पर्क किया जाए ताकि वोटों के बंटवारे पर लगाम लगाई जा सके ।*

*7. चुनाव के बाद फास्स्टि ताकतों द्वारा जन—प्रतिनिधियों की खरीद—बिक्री एवं ब्लैकमेलिंग के माध्यम से दल—बदल की कोशिशों पर लगाम लगाने के लिए चुनाव से पूर्व ही प्रत्याशीयों पर जनता की उचित लगाम लगाने की रणनीति पर गहन विचार विमर्श किया जाए तथा ऐसा मैकेनिज्म तैयार किया जाए कि पूंजीवादियों द्वारा लोकतंत्र को ठगा ना जा सके ।*

*8. जयपुर में सभी नागरिक संगठनों की सहभागिता से लाखों लोगों की एक विशाल ‘जनसभा’ का सुसंगठित व सुव्यवस्थित आयोजन किया जाए, ताकि नागरिकों की ओर से देश भर के नागरिकों को एक स्पष्ट संदेश जाए कि इस देश के मालिक हम हैं, हम यानी हम भारत के लोग, फासिस्ट ताकतें हमारी सेवक मात्र हैं अतः देश में फासिस्ट ताकतों की तानाशाही नहीं चलेगी, देश में सिर्फ संविधानसम्मत लोकशाही चलेगी। यहाँ उल्लेखनीय है कि आयोजन में शामिल प्रत्येक व्यक्ति् का डेटा अवश्य रखा जाए तथा उसे किसी खास डिजिटल प्लेटफार्म से अवश्य जोड़ा जाए ताकि सूचना के आदान प्रदान के संबंध में बिके हुए मीडिया संस्थानों पर निर्भरता कम हो सके।*

*यदि आप हमारे इस प्रयास में सहयोगी बनकर एक देशप्रेमी का फर्ज निभाना चाहते हैं या उक्त रणनीति के संबंध में कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कृपया अविलम्ब सम्पर्क करें ।*

*जय हिंद! जय भारत!जय जगत! जय संविधान!*

*शुभेच्छु :-*

*अनिल यादव* *(9414349467)*
*सम्पादक,बैस्ट रिपोर्टर न्यूज।*
*अध्यक्ष, सतपक्ष पत्रकार मंच।*
*अध्यक्ष, जन संप्रभुता संघ।*

*राजेन्द्र कुम्भज* *(9460723700)*
*कार्यकारी अध्यक्ष,जन संप्रभुता संघ।*

*दीपेन्दु भूषण गुहा* *(9664465456)*
*मुख्यमहामंत्री,जन संप्रभुता संघ।*