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फेरफार में हेराफेरी… ग्रीन बेल्ट वाले खेत में करोड़ों का ‘खेला’

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-पुलिस की शह पर अवैध धंधे वाले एकजुट
-पर्दा उठने पर लगी मिर्ची, अखबारनवीस को धमकाया
-मास्टरमाइंड पुलिसकर्मी की शह पर दी फर्जी रिपोर्ट
मूल.
सच से पर्दा उठने पर मिर्ची लगती ही है। जीवन कोंतमवार और भ्रष्टाचार के गर्त में डूबे अवैध वसूली वाले अधिकारियों को भी तीखी मिर्ची लगी है। जानकारी मिली है कि अपनी पोल खुलती देख जीवन कोंतमवार नेआज गुरुवार को मूल के किसी बार के पास मूल के सभी अवैध धंधेवाले को बुलाया। ये सभी प्रतिबंधित जान लेवा गुटका खर्रा , नकली मीठी सुपारी , माजा , अवैध नकली शराब , जुआअड्डे , सट्टाकिंगों , सेक्स रैकेट से जुड़े जयरामपेशा वाले चेहरे हैं। सूत्र बताते हैं कि वैसे तो सामने जीवन कोंतमवार है, लेकिन वास्तव में यह पूरा खेल एक वर्दीधारी की है, जो असली ‘मास्टरमाइंड’ है।
‘कलम के सिपाही’ के खिलाफ फर्जी रिपोर्ट
अवैध धंधे से जुड़े लोगों की इस गुप्त बैठक का मकसद सिर्फ और सिर्फ खौफ पैदा कर खुद को भंडाफोड़ से बचाना है। इनकी एकजुटता साबित कर रही है कि सभी अवैध कारोबारी तिलमिलाए हुए हैं। इनके खिलाफ प्रकाशित खबरें रंग ला रही हैं। पोर्टल से लेकर दैनिक और साप्ताहिक में समय समय पर इनके गठजोड़ को उजागर करने वाला शख्स इनके निशाने पर है। चंद्रपुर स्थानीय अपराध शाखा के आगे करके ‘कलम के सिपाही’ के खिलाफ फर्जी रिपोर्ट डालने की साजिश रची गई है और यह पूरा काम एक पुलिस अधिकारी के निर्देश व सहयोग किया जा रहा है।
तिलमिलाहट के पीछे ‘लूट’ की कहानी
दरअसल, जीवन कोंतमवार के इस तिलमिलाहट के पीछे ‘लूट’ की अलग कहानी है। राजेश्वर सुरावार के सोमनाथ रोड मूल के खेत में मकडी के जाल की तरह से फैले बिजली के तार महावितरण के अधिकारियों ने हाथ पीले कर बगैर डिमांड खेत मालिकों से रुपया न जमा करवाते हुए महावितरण की तिजोरी से चूना लगा कर बिजली के तारोंका जाल हटवा दिया.. अब इस खेत में सिर्फ बिजली के तारों के खंभे खड़े हैं और इसी प्रकरण में असली खेल छिपा है।
ग्रीन बेल्ट वाले खेत में ‘खेला’
पहले यह खेत चंद्रशेखर दत्तात्रय धर्माधिकारी और लक्ष्मीकांत दत्तात्रय धर्माधिकारी बंधुओं का था। उनसे जीवन कोंतमवार ने खरीद लिया था ! अब इस खेत के कुछ हिस्से पर राजेश्वर सुरावार ( जिले के पालकमंत्री के कार्यालय में कार्यरत ) का भी दर्ज करवाया गया है। धर्माधिकारी बंधुओं के मालिकाना हक में यह खेत था, तब यह खेत ग्रीन बेल्ट में था ! इस खेत के अगल बगल में दूर दूर तक किसी के भी खेत येलो बेल्ट में नही हैं, लेकिन जीवन कोंतमवार और राजेश्वर सुरावार के तीन तिकडम से मूल नगर परिषद के पूर्व प्रशाषक इस खेत को ग्रीन बेल्ट से येलो बेल्ट में परिवर्तित कर दिया। यानी उस खेती की जमीन को रहिवासी निवास की जगह में इस्तेमाल करने फेरफार पूरी तरह से नियमबाह्य तरीके से कर दिया। ग्रीन बेल्ट से यलो बेल्ट करवाने मोटे माल से हाथ पीले किये गये।
महावितरण को लगाया चूना
एक तो महावितरण के मूल उपशाखा के कथित अधिकारियों ने खेत मालिक से बिजली के तार हटवाने का डिमांड नहीं भरवाया उनके लाखों का खर्च बचा दिया और अपनी जेब गर्म करके महावितरण के तिजोरी को चूना लगा दिया था। इस संबंध मूल कार्यालय के कथित अधिकारियों से पूछने पर वह चंद्रपुर के कार्यकारी अभियंता के कार्यालय की ओर उंगली उठाकर सीधे उन्हीं पर दोषारोपण कर रहे हैं कि हमने उनके आदेश से बिजली के तार कोंतमवार और सुरावार के खेत से हटाये थे। इस प्रकरण की भी गंभीरतापूर्वक जाँच होनी चाहिये और दोषियों पर कार्यवाही होनी चाहिये।
33 करोड़ का रुका बिल भी तिकड़म से लिया
जीवन कोंतमवार का पूर्व इतिहास अपराधों से भरा पडा है। साल 2010 में मूल में यशोदा सीड प्रकरण में उसे ब्लैकमेलिंग कर लाखों की रिश्वत मांगने के मामले में गिरफ्तार तक किया गया था। शासकीय धान की खरीदी प्रकरण में भी जीवन कोंतमवार का नाम काफी चर्चित हुआ था। बतलाया जाता है कि इस मामले में भी मंत्रालय से करीब 33 करोड ₹ ( तैंतीस करोड रुपये ) का रुका हुआ बिल भी राजकीय तीन तिकड़म से हाल ही में इसे मिल गया।
कड़ी कार्रवाई की मांग
महावितरण के बिजली तारों के नियमबाह्य तरीकेसे हटवा देने के मामलेमें महावितरण के भ्र्ष्टाचार के गर्त में डूबे अधिकारियों पर और खेत को ग्रीन बेल्ट से येलो बेल्ट में फेरफार करने की हेराफेरी का मामला भी उजागर होना चाहिए। महाराष्ट्र शासन ने इस अति गंभीर प्रकरण ओपन करके अपराधियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
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