लोकसभा चुनाव से पहले मालिकाना अधिकार नहीं मिला तो बीजेपी का होगा विरोध

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43 वर्षों से लम्बित समस्या: श्रम विभाग के खिलाफ धरना-प्रदर्शन !

नैनी, प्रयागराज।
नैनी, प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ समेत उप्र के कई जिलों के लगभग डेढ़ करोड़ मज़दूरों को उनके आवासों का मालिकाना अधिकार दिए जाने की मांग को लेकर आज मानस पार्क, श्रमिक बस्ती, नैनी में धरना-प्रदर्शन के माध्यम से विरोध व्यक्त किया गया।
धरना-प्रदर्शन में शामिल आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग किया है कि पिछले 43 वर्षों से लंबित उत्तर प्रदेश औद्योगिक श्रमिक बस्तियों के मालिकाना अधिकार की समस्या का निराकरण लोकसभा चुनाव 2024 के पहले किया जाए। अन्यथा इन कॉलोनियों में रहने वाले लोग बीजेपी सरकार का विरोध करेंगे।
श्रमिक बस्ती समिति के सचिव विनय मिश्र ने धरना स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश श्रम विभाग के तानाशाही पूर्ण रवैये के कारण यह मामला अधर में लटका हुआ है।
केंद्र सरकार ने 1978 में मालिकाना आदेश दिए जाने का आदेश जारी किया था। देश के सभी राज्यों ने इन कॉलोनियों के आवासों का मालिकाना अधिकार उसमें रहने वाले लोगों को दे दिया। लेकिन उत्तर प्रदेश श्रम विभाग जानबूझकर इस मामले को लटकाए हुए हैं।
श्रम विभाग के तानाशाही पूर्ण रवैये के कारण पूरे प्रदेश की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
वक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस संबंध में समिति का गठन किया है। पहले भी कई बार समितियां गठित हो चुकी है। लेकिन धरातल पर कोई ठोस काम नहीं हुआ।
समिति के सचिव विनय मिश्र ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उत्तर प्रदेश श्रमिक कॉलोनियों की समस्या का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे और पूरे उत्तर प्रदेश के समस्त मजदूर, किसान, नौजवान छात्रों के द्वारा सरकार के इस दमनकारीपूर्ण लापरवाही बरतने का विरोध किया जाएगा।
वक्ताओं ने कहा कि नैनी में मजदूरों के लिए बनाई गई कॉलोनी में 42 वीं वाहिनी पीएसी के लोग जबरन कब्जा करके यहां स्थाई निर्माण कर रहे हैं। जिससे स्थानीय जनता में भारी रोष व्याप्त है।
पीएसी के लोग श्रमिक कॉलोनी में लोगों के घरों के सामने कूड़ा फेंक कर भारी अभद्रता कर रहे हैं।
कॉलोनी में गंदगी फैला रहे हैं। प्रधानमंत्री के सफाई अभियान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कई ट्रक कचरा बच्चों के खेलने वाले राजकीय श्रम हितकारी पार्क के मैदान में फेंक दिया गया है। जिसकी वजह से संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं। कूड़े के ढेर में आग लगा देने के कारण धुआं उठता है। जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है।
घोर आश्चर्य की बात तो यह है कि उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के आदेश की अवहेलना की जा रही है और उत्तर प्रदेश श्रम विभाग के अधिकारी मुख्यमंत्री के आदेश के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
आंदोलन के संयोजक, श्रमिक बस्ती समिति के सचिव विनय मिश्र ने कहा है कि मालिकाना अधिकार दिए जाने के लिए शासन ने प्रदेश स्थित औद्योगिक श्रमिक बस्तियों को बेचने का निर्णय लिया था।
सन 1995 में बिक्री प्रक्रिया शुरू भी की गई। लेकिन श्रम विभाग के अधिकारियों ने साजिश रची, बिक्री प्रक्रिया को रुकवा दिया। जिसकी वजह से प्रदेश के लाखों लोग आज भी मालिकाना हक से वंचित है।
श्रमिक बस्ती समिति के सचिव विनय मिश्र ने कहा कि मालिकाना अधिकार के लिए नैनी में आंदोलन चल रहा है। जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा श्रमिक बस्ती के निवासियों का आंदोलन चलता रहेगा।
धरना-प्रदर्शन आंदोलन में सर्वश्री सभाजीत यादव, प्रभु दयाल यादव, उमानंद मिश्र, सत्येंद्र यादव, उमेश कुशवाहा, गुड्डू राय, आनंद सिंह, जगबरन सिंह, मोहम्मद शाहिद, अजमत हुसैन, विनय मिश्र, जवाहर यादव आदि लोग उपस्थित थे।