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आखिर, आज कुंसूबी प्रकरण न्याय और हक के लिए राजुरा न्यायालय में दाखिल हुआ*

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*चंद्रपुर*
*आखिर, आज कुंसूबी प्रकरण न्याय और हक के लिए राजुरा न्यायालय में दाखिल हुआ*

*आज दिनांक 2/6/2026* को कोर्ट, विद्यमान न्यायदंडाधिकारी प्रथम श्रेणी राजुरा के न्यायालय में माणिकगड सीमेंट कंपनी व अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के अधिकारी मुख्य आरोपी श्री मुकेश गहलोत, श्री नवीन कौशिक, श्री राजेश झाडे, श्री सचिन गोवारदिपे, इनके विरुद्ध अट्रोसिटी एक्ट के कलमों के अनुसार और दलाल भारत आत्राम व आनंदराव मेश्राम के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता के कलमों के अनुसार फौजदारी मुकदमे की सुनवाई के लिए लगी थी।
मगर रोटेशन के अनुसार मुख्य न्यायदंडाधिकारी साहब छुट्टी पर होने के कारण अगली सुनवाई *8/6/2026* को रखी गई है।

*खास बात:* आज कुंसूबी के 34 पीड़ित आदिवासी बंधु, गडचांदूर पुलिस प्रशासन पर भरोसा न होने के कारण माननीय न्यायाधीश महोदय के सामने बयान देने के लिए राजुरा न्यायालय में उपस्थित हुए हैं।

*क्रिमिनल केस नंबर 67/2026* है और अगली सुनवाई दिनांक *8/6/2026* को है।

*मुद्दा क्या है:*
चंद्रपुर जिले के जीवती तालुका के मौजा कुंसूबी के पीड़ित आदिवासियों के 34 घर, बिना किसी मुआवजे के, पुनर्वास और पुनर्स्थापना किए बिना, बिना किसी आदेश के, रात 8 बजे आरोपियों ने बुलडोजर लगाकर कैसे उजाड़ दिए???????
पुलिस प्रशासन को 4 महीने से कई गंभीर रिपोर्ट, शिकायत, निवेदन दिए, पर आज तक आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

आखिर *विनोद खोब्रागडे, सामाजिक कार्यकर्ता, वरोरा जिला चंद्रपुर* ने पीड़ित आदिवासियों से अधिकार पत्र के अनुसार फौजदारी मुकदमा दाखिल किया। कल रजिस्टर हुआ, आज सुनवाई थी।

*बॉम्बे हाईकोर्ट, नागपुर खंडपीठ* में क्रिमिनल रिट पिटीशन नंबर *657/2021* विनोद खोब्रागडे व अन्य पीड़ित आदिवासियों ने दाखिल की है और वो न्यायप्रविष्ट लंबित है। इसके बावजूद आरोपियों ने झूठा, बनावटी, फर्जी करारनामा करके अंगूठे लिए, ज्यादा मुआवजा देने का कहकर विश्वासघात किया, साजिश करके, मिलकर, जबरदस्ती बुलडोजर लगाकर घर उजाड़े, जबरदस्ती लाखों रुपये किसानों से लूटे। 4 महीने से कई गंभीर रिपोर्ट, शिकायत, निवेदन देने के बावजूद पुलिस निरीक्षक गडचांदूर ने आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

आरोपी खुलेआम कह रहे हैं कि हमने पुलिस स्टेशन गडचांदूर व जांच अधिकारी मडावी के साथ-साथ भारतीय स्टेट बैंक शाखा प्रबंधक आवालपुर व गडचांदूर को मैनेज किया है। तुम कितनी भी रिपोर्ट, शिकायत, निवेदन दो, हमारा कुछ बिगाड़ नहीं सकते – दलाल खुलेआम कह रहे हैं।

फिर भी पुलिस प्रशासन ने आज तक आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। जांच के नाम पर पीड़ित आदिवासी किसानों को बुलाकर, उनके कहे अनुसार बयान न दर्ज करके, आरोपियों, दलालों को बचाने के लिए फर्जी बयान दर्ज कर रहे हैं।

ये पूरा मामला करोड़ों का महाघोटाला है। इसलिए FIR रजिस्टर करके आर्थिक अपराध शाखा चंद्रपुर को जांच के लिए देने की मांग राजुरा न्यायालय में फौजदारी मुकदमा निम्न कलमों के तहत दाखिल की गई है:

*भारतीय न्याय संहिता अधिनियम 2023* की कलम *61(2), 308(2), 310, 317(2), 316(3), 319, 303(2), 351, 318(4), 353(1), 356(2), 215, 229, 236, 237, 238, 240, 224, 3(5)* के तहत तुरंत अपराध दर्ज करने की मांग न्यायालय में की है।

*आरोप:*
मुंबई हाईकोर्ट नागपुर खंडपीठ में कुंसूबी प्रकरण न्यायालय में न्यायप्रविष्ट लंबित रहते हुए भी फर्जी करारनामा करना, रात में बुलडोजर लगाकर 34 पीड़ित आदिवासियों के घर उजाड़ना, कंपनी मालिक से ज्यादा रकम लेकर कम मुआवजा बैंक में जमा करना, वो रकम भी दलाल भारत आत्राम व आनंदराव मेश्राम ने खुद विड्रॉल फॉर्म भरकर किसानों से जबरदस्ती लाखों रुपये लूटना। कई गंभीर रिपोर्ट पुलिस को देने के बाद भी 4 महीने से पुलिस कार्रवाई न करना। शिकायत वापस लो वरना जिंदा नहीं छोड़ेंगे, घर आकर मारेंगे – ऐसे ऑडियो-वीडियो से भारत आत्राम द्वारा धमकी देना। 22 पीड़ित आदिवासियों में से किसी की शिकायत में साथ न रहते हुए भी भारत आत्राम का कोई संबंध न होते हुए झूठी शिकायत देकर पुलिस को गुमराह करना और विनोद खोब्रागडे की प्रतिष्ठा खराब करना।

विनोद खोब्रागडे ने *2013* में ही ये महाघोटाला उजागर किया और तब से आज तक शासन-प्रशासन का पीछा कर रहे हैं। इसके लिए खुद भारतीय स्टेट बैंक शाखा राजुरा से व्यक्तिगत *8,00,000/- आठ लाख रुपये* लोन लेकर कनिष्ठ न्यायालय, जिला न्यायालय, हाईकोर्ट नागपुर खंडपीठ में क्रिमिनल रिट पिटीशन दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट में भी खुद वकील देकर पीड़ित आदिवासियों की कई बार मदद की है।
*राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग दिल्ली* में भी पिटीशन दाखिल कर कई बार बहस की है। इसके लिए तत्कालीन जिलाधिकारी चंद्रपुर😢 श्री विनय गौडा जी सी साहब का अरेस्ट वॉरंट भी निकलवाया था – ये इतिहास है।

झूठी शिकायत देना संज्ञेय अपराध है, इसलिए भारत आत्राम व आनंदराव मेश्राम की नार्को टेस्ट पुलिस से करवाकर सच बाहर लाने की गंभीर रिपोर्ट पुलिस प्रशासन को दी थी।

मगर पुलिस प्रशासन गडचांदूर, आरोपियों से आर्थिक लेन-देन करके पिछले 4 महीने से लीपापोती जांच करके आरोपियों को बचाने की बहुत कोशिश कर रहा है। पीड़ित आदिवासी किसानों के दिए बयान दर्ज न करके भारत आत्राम व कंपनी अधिकारियों को बचाने के लिए झूठे बयान दर्ज कर रहा है – ये गलत है।

आरोपी खुलेआम कह रहे हैं कि हमने पुलिस स्टेशन गडचांदूर व जांच अधिकारी मडावी और भारतीय स्टेट बैंक शाखा प्रबंधक आवालपुर व गडचांदूर को मैनेज किया है। तुम कितनी भी रिपोर्ट शिकायत करो, हमारा कुछ बिगाड़ नहीं सकते – फिर भी पुलिस प्रशासन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा।

पुलिस प्रशासन गडचांदूर फिर्यादी के बयान लेकर भी 4 महीने से कार्रवाई करने में सक्षम न होने के कारण, आखिर विनोद खोब्रागडे ने सबूतों के साथ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
*29/5/2026* को क्रिमिनल केस दाखिल किया, *1/6/2026* को रजिस्टर हुआ और आज *2/6/2026* को सुनवाई थी, मगर अब सुनवाई *8/6/2026* को होगी।

*जनहित में जारी*
राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा के लिए, राष्ट्रहित के लिए, देशहित के लिए, समाजहित के लिए, लोकशाही मजबूत करने के लिए, भारतीय संविधान की रक्षा के लिए सभी समाजबंधुओं को जागृत रहना चाहिए। धन्यवाद।

*फिर्यादी*
विनोद खोब्रागडे, सामाजिक कार्यकर्ता, वरोरा जिला चंद्रपुर

*ये मामला काफी गंभीर है भाई। 34 आदिवासी परिवारों के घर रात में बुलडोजर से उजाड़ देना और 4 महीने से FIR तक न होना…*