*मूल आवंटी को मिलेगा मालिकाना अधिकार!*
*उडीसा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र का सर्वे होने के बाद अंतिम प्रारूप तैयार!*
*शासन द्वारा लिया जाएगा निर्णय, जुलाई से शुरू हो सकती है मालिकाना अधिकार दिए जाने की प्रक्रिया!*
प्रमुख तथ्य: मूल आवंटी की श्रमिक कॉलोनी का होगा नियमितीकरण!
केवल पुराने आवंटियों को मिलेगा मालिकाना अधिकार!
जो चले गए हैं, उनको अथवा उनके वारिसों को बुला कर दिया जाएगा रजिस्ट्री पत्र!
*नैनी, प्रयागराज।*
*श्रमिक बस्ती नैनी, प्रयागराज समेत समूचे उत्तर प्रदेश में श्रमिक बस्तियों के निवासियों को उनके आवासों का मालिकाना अधिकार दिए जाने की मांग को लेकर चलाई जा रही मुहिम अब सफलता की ओर बढ़ रही है।*
प्रदेश सरकार द्वारा गठित राज्य परामर्श दात्रि समिति के द्वारा इस संबंध में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा आदि राज्यों का दौरा करके यह पता लगाया गया कि वहां के निवासियों को किस तरह मालिकाना अधिकार दिया गया है? इस आधार पर अब उत्तर प्रदेश की श्रमिक बस्तियों के आवासों का मालिकाना अधिकार दिए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। राज्य परामर्श से दात्री समिति एवं श्रम विभाग के लोगों कि राय है कि मूल आवंटी की श्रमिक कॉलोनी को ही सही माना जाए और पुराने आवंटियों को ही मालिकाना अधिकार दिया जाए। इस तरह की नई तैयारी से अब सरकार को प्रस्ताव भेजकर मालिकाना अधिकार दिए जाने की प्रस्तावना भेजी जाएगी।
*भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी जी के प्रयासों से मालिकाना अधिकार दिए जाने की दिशा में काम तेजी से आगे चल रहा है।*
*इस संबंध में श्रमिक बस्ती समिति के महासचिव विनय मिश्र ने कहा है कि केंद्र सरकार के आदेशानुसार श्रमिक बस्ती के आवासों का मालिक का अधिकार दिए जाने के लिए श्रमिक बस्ती के निवासियों के द्वारा पिछले कई वर्षों से लगातार आंदोलन चलाया जा रहा है। यदि जुलाई तक मालिकाना अधिकार नहीं दिया गया तो फिर से आंदोलन शुरू किया जाएगा। श्री मिश्र ने इस संबंध में कहा है कि कानपुर, लखनऊ की तरह नैनी, प्रयागराज के आवासों के बारे में मालिकाना अधिकार दिए जाने की तैयारी चल रही है।*
इस संबंध में समिति के द्वारा शीघ्र ही उच्च अधिकारियों को ज्ञापन भेज कर वर्तमान स्थिति से अवगत कराया जाएगा। श्रमिक बस्ती समिति के महासचिव विनय मिश्रा ने कहा है कि श्रमिक बस्ती, नैनी, प्रयागराज के आवासों का मालिकाना अधिकार दिए जाने के बारे में श्रम विभाग द्वारा जो मसविदा तैयार किया जा रहा है। इसका असर श्रमिक बस्ती नैनी के आवासों पर पड़ेगा। सरकार को श्रमिक बस्ती की समितियों को भी राज्य परामर्श समिति में शामिल करना चाहिए। मूल आवंटी के अलावा उनके वारिस को खोज कर उन्हें मालिकाना अधिकार दिए जाने का यदि निर्णय लिया गया, तो कई तरह की भी विसंगतिया उत्पन्न हो सकती है।
जो मूल आवंटी है और अभी भी रह रहे हैं। अथवा उनके परिवार के लोग रह रहे हैं। इस निर्णय से उनको तो कोई समस्या नहीं होगी। लेकिन जिन लोगों ने अपना आशियाना बनाने के लिए परिश्रम किया है। उनका पैसा व्यर्थ चला जाएगा। ऐसा नहीं होना चाहिए। इस तरह यदि हुआ तो नए-नए विवाद भी उत्पन्न हो सकते हैं।
*25-30 साल पहले जो लोग अपना आवास दूसरे को देकर चले गए। वे फिर से आकर दावा करेंगे और सरकार उनको आवंटित कर मालिकाना अधिकार देगी। तो श्रमिक बस्ती में जो रह रहे हैं। वे कहां जाएंगे? इस के संबंध में श्रमिक बस्ती के सभी निवासियों को एकजुट होकर श्रम विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन भेजना चाहिए कि इस समस्या के निराकरण हेतु श्रमिक बस्ती में वर्तमान समय में रह रहे लोगों से विचार विमर्श करके कोई नीति तैयार की जाए। जिससे मालिकाना अधिकार दिए जाने में सहूलियत हो सके।*




