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विकसित राजस्थान/2047 के विजन को साकार करने में मिलेगा महत्वपूर्ण योग

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विकसित राजस्थान/2047 के विजन को साकार करने में मिलेगा महत्वपूर्ण योग –

मुख्य सचिव,

जयपुर /आशा पटेल
13 फरवरी। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने कहा कि 6.11 लाख करोड़ रूपये के राज्य बजट प्रावधान से राज्य के समावेशी विकास के लिए सुदृढ़ वित्तीय आधार प्राप्त हुआ है। उन्होंने रेखांकित किया कि 4.88 लाख करोड़ रूपये की प्राथमिकता ऋण संभाव्यता को ठोस परिणामों में परिवर्तित करने के लिए नाबार्ड, एसएलबीसी, सहभागी बैंकों एवं संबंधित विभागों के समन्वित प्रयास अति आवश्यक हैं, ताकि कृषि, एमएसएमई, अवसंरचना और ग्रामीण आजीविका के क्षेत्रों में संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके। मुख्य सचिव शुक्रवार को राज्य ऋण संगोष्ठी के अवसर पर राज्य फोकस पेपर वर्ष 2026-27 के विमोचन अवसर पर बोल रहे थे।

श्री वी. श्रीनिवास ने ऋण-आधारित एवं अवसंरचना-सम्मिलित विकास को गति देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि राज्य फोकस पेपर में वित्त वर्ष 2026-27 हेतु 4.88 लाख करोड़ रूपये की प्राथमिकता क्षेत्र ऋण संभाव्यता का आकलन किया गया है, जिसमें 2.24 लाख करोड़ रूपये कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों तथा 2.27 लाख करोड़ रूपये एमएसएमई क्षेत्र के लिए निर्धारित हैं, जो कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों में संतुलित विकास रणनीति को दर्शाता है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि ऋण प्रवाह को पेयजल, सिंचाई, ऊर्जा नवीकरणीय, ग्रामीण सड़कों तथा एमएसएमई विकास जैसे प्रमुख सार्वजनिक निवेशों के साथ समन्वित किया जाए ताकि ठोस आर्थिक परिणाम सुनिश्चित हो सकें। उन्होंने लघु एवं सीमांत कृषकों, महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, एफपीओ तथा सहकारी संस्थाओं तक वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाये।

मुख्य सचिव ने कहा कि समन्वित संस्थागत प्रयास एवं सुदृढ़ निगरानी तंत्र के माध्यम से वार्षिक ऋण योजना के लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित होगी तथा विकसित राजस्थान/2047 के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

बैठक में नाबार्ड को राज्य फोकस पेपर के अनुमानों को जिला ऋण योजनाओं एवं वार्षिक ऋण योजना के साथ समन्वित करने तथा अवसंरचना वित्तपोषण, एफपीओ संवर्द्धन, सहकारी संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण एवं पुनर्वित्त समर्थन तंत्र को मजबूत करने हेतु निर्देशित किया गया। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति एवं सहभागी बैंकों को भी निर्देशित किया गया कि वे अनुमानित ऋण संभाव्यता को जिला-वार, समयबद्ध एवं निगरानी योग्य लक्ष्यों में परिवर्तित करें तथा कम बैंकिंग कवरेज वाले जिलों में क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में सुधार सुनिश्चित करें। बैंकों को कृषि अवसंरचना, कृषि मूल्य श्रृंखला, एमएसएमई, नवीकरणीय ऊर्जा पहलों तथा युवा स्वरोजगार योजनाओं के लिए ऋण प्रवाह को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एम.एस.एम.ई.) श्री शिखर अग्रवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव, उर्जा विभाग, श्री अजिताभ शर्मा, प्रमुख शासन सचिव, कृषि एवं उद्यानिकी श्रीमती मंजू राजपाल,शासन सचिव, वित्त (बजट) विभाग, श्री राजन विशाल, शासन सचिव, पशुपालन, डॉ. समित शर्मा, शासन सचिव एवं पंजीयक, सहकारिता विभाग, श्रीमती आनन्दी, प्रबन्ध निदेशक, राजस्थान सहकारिता डेयरी फेडरेशन लिमिटेड, श्रीमती श्रुति भारद्वाज, श्री अनिल मेनन, संयोजक एसएलबीसी, डॉ. आर रवि बाबू, सीजीएम, नाबार्ड, श्री विकास अग्रवाल, डीजीएम आरबीआई, संयुक्त शासन सचिव, संस्थागत-वित्त श्री सी.पी मंडावरिया उपस्थित रहे।